ठियोगौ रे पाड़ी सौंस्कृति (ज़िला शिमला)
शिमलै ज़िलै रौ ठियोगौ हिमाचल प्रदैशौं रै पाड़ी सौंस्कृति रै विरासौतों रा एक हौद ज़रूरी हिस्सा अ। ऐज़ी ज़ागै रे सौस्कृति पौराणै रीति-ऱवाजों रे मौलौ दो, प्रकृति दो तौईं माछौं रा आपू माज़ै बौड़ीया मैलौ-ज़ौलोंऱी ज़िदगीं दो हौद भीठकौं दो जुड़ै दा ओ। ठियोगौ रे मांछ आपणै सादै ज़िदगैं , हौद़ मेनतैक तौईं ब़ज़ुर्गौं दौ चालै हौंदैं रिती- ऱवाजों तौईं परंपराओं री तैंईक मांछौं रे इज़्जौतै रे तैंईक जाणैं जायीं।
मांछौ रो नाच़णो तोईं रिति-रिवाज़
मांछौं रा पारंपारिक नाच़णा, खासकौर ईंथै रे “नाटी‘, टियोंगौ रे नाटी ईथैं रे सौस्कृति रे ज़िदंगैं रा हौद ज़रूरैं हिस्सा ओ। नाटी मैळै दे, शाद़ी दे, त्याआरों दे, तौईं दार्मिक कारज़ करज़ामौं दे कि जाईं। नाटी ढ़ौलों, ऩगाड़ै तौंई करनाळै साथै , आपणै दैओं-दौषी रे तैंईक श्रौरदा विश्वास तौईं प्रकृति री तैंईक प्यार, तौईं गांओं रे माछों रे रोज़ कै ज़िदगैं रे बारे दो दोसो।
टुकड़ा
ठियोगौं रौ पांरपारिक बूर्ज़ौण सादौ, शरीरौं रे तैंईंक ताग़तदार,तौंई ईथैं री शौळी ज़ागैं रे साबै क ठीक अ। ज़रुरी खाणै रे च़िजौं दै राज़मा, जौं, चाओळ ओ। ईथैं रै स़िढू-घीऊं, पटाढैं,कढौई, तौंई घीऊं , दौयै, माक्खण रौजौंकि जिंदगैं दौ इस्त़ैमाल़ कौरा ज़़ायी।
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ज़िन्दगे ज़ीओणे
ठियोगौ रे मांछौ रे जिंदगैं गौरों-गांओं तौई कृषि गायै ओ। फौसऴो लाणी,सैओ रे बागबानै, गौरू पाळणी इतैंऱे माछौं रा काम ओ। स्लैटौं रे छ़ौतौं आळै पराणै तरिकैं दै लाकड़ि तौंईं पात्थौरों रे ब़ौणैं ओंदै गौरौं ईथैं रे काऱीगीरै दखैओं।परिवारों रे आपू माज़ै पाक्का रिश्ता, मांछौं रा एकि -दुजै साथै आच्छा मैल जौल,तौईं आपणै बज़ुर्गौं रे तैईक इज़्जत कौरणै इथै रे माछौं रे खास बात ओ।