पहाड़ी महासु रे बारै दो
पहाड़ी महासू ज़ागा हिमाचल प्रदेशों हिमालयों हिपरैं रे टीबैं रे बीचों दे बौसें होन्दों एक हौद सुन्दर तौंई पराणैं सौस्कृति दों बौरे हौन्दैं एक शौबलैं ज़ागा ओसो।महासू ज़ागा पराणैं बौक्दों दों ई आपणीं मैनतैं, ईथैं रे माछों रे आपू माज़ैं बौड़ीया रिश्तैं तौंईं हौद पक्कैं पूजैं-पाठों तौंई भगबानौं री तैं बिशवासों आळैं माटैं ओसो।
महासूं दै रौओंणैं आलैं माछोंक पहाड़ी माछं बौलों, तिनौरे जिन्दगैं खैचों दैं कामों कौरणैं पाँ,गाओं रे ओरे-पोरे कामैं पां, प्रकृति रा मान कौऱणौं ,तौंई आपु माज़ैं आपणैं माछौं री मौदत कौरणैं पां जिन्दगैं कौटों । ऐज़ी ज़ागैं री आपणैं ऐक शौबलैं ज़़ान-पहचान ओअ, ईतैरें आपणैं भाषा, गाणैं,तिज़- त्यार तौंई पराणैं रीति-रवाज़ों रे ज़ोरियों आपू माछों आगैं प्रस्तुत कौरों ।
पराणैं जमानैं रे बौक्तैं, महासू रा इलाका आपणैं रीती-रवाज़ों परम्पराओं दो तौंई आपणैं हौकों री लड़ाई लौड़नैं पां जाणा जायीं। बौक्तौं साथैं शिक्षा, सेवा तौंई बिकास बीं ऐज़ैं इलाकैं ताईंक पूज़ा, जैंईऐं ईथैं रे माछं गाऊं बौड़ैंनैं दे मौदत मिली, जबकि से इथैं रे सांस्कृति री जौड़ों दी समायैं होंन्दैं ओअ।