Pahari Mahasu
ऐ कताब हामौरी भाषै सौई त्रीकै लिखणैं तौंई पौढ़णैं दे हामौरे मौदत कौरौ। भाषै रै माईर ज़ाणंकारौ री तौंई पहाड़ी महासु भाषा बोलणैं आळै माछौ मौदतेयै एक आक्षौरमाला (आखौरमाला) त्यार कौरे गोए थे। तिनौ बादै झ़ौणैं री नांओ कताबौ दी लिखी दौ अ।
ऐ कताब पौलकी बौंई पहाड़ी महासु भाषै लिखणैं तौंई पौढ़णैं दे मौदत कौरौ। एज़ी बौज़ै इंदै आखौरौ लिखणैं रे नियम, आक्षौरमाला, माठी-माठी काणीं, तौंई आक्षौरौ रै मौतलबौ लिखै होंदै अ। ऐ बादी बातौ महासु भाषै पौढ़णें तौंई लिखणैं रा काम सान टैंऔ ।
हामै ऐ कताब बिणं कींयै गौलतीयै टैंओणैं रे पूरे कोशिश कौरे अ, तौबै बी शायद इंदी कींयै गौलती रौई ओली। ऐंईरीतैंई हामौरे तुमौदौ औरौज़ अ की तुमै हामौ आपणैं कीमते स्ला-मशुरा ज़रुर दैए, ज़ैंईयै हामै इंदी रौई दौ कौमी तौंई ओई दौ गौलती स्दार सौकु। गांऊक हामै ऐंई कबातौ रे आखरी छ़पाए कौरुमे तौंई ऐ कताब बादै क बांडुमै।